बेसहारा को स्वरोजगार राशन की दुकान

January 9, 2024

35 वर्षीय मनीषा जी बैरागी कैम्प, हरिद्वार में एक झोपड़ी में रहती हैं। उनके पति के आकस्मिक निधन के बाद उनके पास आय का कोई साधन नहीं था। अब उन पर अपने दो बच्चों का पालन करने और पढ़ाने की जिम्मेदारी थी। मनीषा जी ने अपने समाज के लोगों से साहयता मांगी पर उन्हें निराशा हाथ लगी। फिर उन्हें श्री राघव जी सामाजिक कार्यों के बारे में पता चला और उनसे स्वरोजगार शुरू करने हेतु वित्तीय साहयता मांगी। उनकी समस्या को समझते हुए उन्होंने उनके लिए एक दुकान का निर्माण कराया और किरयाना का पूरा सामान खरीद कर उनकी दुकान शुरू करवाई। आज मनीषा जी न केवल आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि उन्होंने अपने समुदाय के लिए एक सेवा केंद्र भी चलाना शुरू कर दिया है।

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