कर्मचरियों के साथ कार्यालय में महाराणा प्रताप की जयंती मनाई।

May 9, 2024

निःस्वार्थ कदम संस्था की टीम ने कंपनी के कर्मचरियों के साथ कार्यालय में महाराणा प्रताप की जयंती मनाई। महाराणा प्रताप का जन्म 09 मई 1540 को उदयपुर के निकट कुंभल किले में हुआ था। उनके पिता उदय सिंह ने अपने छोटे बेटे को राजगद्दी सौंप दी जिसने मुग़ल बादशाह अकबर की गुलामी स्वीकार कर ली। मेवाड की जनता ने अपने सम्मान बचने के लिए महाराणा प्रताप को राजा के रूप में शपथ दिलाई। हल्दी घाटी के युद्ध में उनको अपने ही भाई और आमेर के राजा मान सिंह के नेतृत्व में मुगलों की एक लाख सेना से युद्ध करना पड़ा। अपने घोड़े चेतक की मृत्यु के कारण उन्हें हार का सामना करना पड़ा । चेतक की मृत्यु के बाद उन्होंने अरावली की गुफाओं में शरण ली और घास की रोटी खाकर अपने आत्मसम्मान को बनाये रखा और अपने लोगों के सम्मान को बचाने के लिए भील योद्धाओं के साथ मिलकर मुगलों से लड़ते रहे। 29 जनवरी 1597 को युद्ध में घायल हो जाने पर उन्होंने अंतिम सांस ली।

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